आवारा पंछी

आवारा पंछी मैं एक आवारा पंछी, डाल – डाल पर मेरा बसेरा। न जाने सांझ कहाँ बीती, बीता कहाँ सवेरा। अम्बर में उड़ते बादल- मेरे...

बस एक बार

खामोश लबों की आवाज़… सुनो दिल की धड़कन से… हर धड़कन में तेरे नाम की… आवाज़ आएगी…. ना जा आँखों के सुनेपन पर… देख उनको…...

उठ जा

भोर हुई उठ जा मनवा… अब किसका इंतज़ार करे… सूरज की किरणों ने दे दी… दस्तक तेरे द्वारे… अब क्यूँ आलस्य की… सीमा पार करे…....

चाह

ख्वाहिशें अधूरी… तमन्नायें अधूरी… जिंदगी की हर बात… अधूरी सी लगी.. यह मिला तो वो चाहा… वो मिल गया तो और चाहा… इस चाहत चाहत...

चल उठ

चल उठ… उठ कर… कोई काम कर तू.. खाली बैठ कर.. ना बोर हो… ना बोर कर तू… हँस तू… हँसा तू…. सब संग.. खुशियाँ...

माँ

मेरी रब तू मेरी भगवन तू….. तू ही मेरी अरदास है…. क्यों मै जाऊँ… मंदिर मस्जिद गुरुद्वारे… जब माँ तू मेरे पास है… बरसे जुबाँ...