चाह

ख्वाहिशें अधूरी…
तमन्नायें अधूरी…
जिंदगी की हर बात…
अधूरी सी लगी..
यह मिला तो वो चाहा…
वो मिल गया तो और चाहा…
इस चाहत चाहत में…
हर चाहत अधूरी सी लगी…
ख़ुशी मिली…
कभी कम तो कभी ज्यादा मिली…
पर अगली ख़ुशी की चाहत में…
हर ख़ुशी अधूरी सी लगी…
दामन फैला लिया…
अरमानों का इतना ज्यादा…
के हर बिता दिन अधूरा सा…
हर रात अधूरी सी लगी…
मत फैला ख्वाहिशों के पर इतने…
के खुले आसमां में भी…
तुझे जगह अधूरी सी लगी…

~ललित चिण्डालिया💕💕

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